U.R GUPTA
- gshubhamkumar48
- Oct 26, 2024
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बहुत शानदार लिखा है किसी ने
*"अच्छी थी, पगडंडी अपनी,*
*सड़कों पर तो, जाम बहुत है!!*
*फुर्र हो गई फुर्सत, अब तो,*
*सबके पास, काम बहुत है!!*
*नहीं जरूरत, बूढ़ों की अब,*
*हर बच्चा, बुद्धिमान बहुत है!!*
*उजड़ गए, सब बाग बगीचे,*
*दो गमलों में, शान बहुत है!!*
*मट्ठा, दही, नहीं खाते हैं,*
*कहते हैं, ज़ुकाम बहुत है!!*
*पीते हैं, जब चाय, तब कहीं,*
*कहते हैं, आराम बहुत है!!*
*बंद हो गई, चिट्ठी, पत्री,*
*व्हाट्सएप पर, पैगाम बहुत है!!*
*झुके-झुके, स्कूली बच्चे,*
*बस्तों में, सामान बहुत है!!*
*नही बचे, कोई सम्बन्धी,*
*अकड़,ऐंठ,अहसान बहुत है!!*
*सुविधाओं का,ढेर लगा है यार..*
*पर इंसान, परेशान बहुत है!!*
🌷🙏सुप्रभात🙏🌷




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